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NCERT class 10 English Footprints without Feet Chapter 5 summary Footprints without Feet (notes) explained (translation) in hindi

Footprints without Feet Summary In English

Boys see footprints from nowhere
The two boys were surprised to see the fresh muddy imprints. These were of a pair of bare feet. As they gazed, a fresh footmark appeared from nowhere. Then they saw further steps down the street. Thereafter, they disappeared.

Footprints of Griffin, an invisible scientist
These footprints were of a scientist named Griffin. He had just discovered how to make the human body transparent. He swallowed some drugs. His body became as transparent as a sheet of glass. It was before his footprints being seen.

 

Griffin a lawless person
But Griffin was rather a lawless person. His landlord disliked him and tried to eject him. In revenge Griffin set fire to the house. He had to remove his clothes to get away. So he became a homeless wanderer, without clothes or money. The two boys had seen him thus.

Griffin’s escape
Griffin escaped from the boys. He was without clothes in mid-winter at that time. Instead of walking about the streets, he entered a big London store for warmth. He broke open boxes. He fitted himself with warm clothes. He had shoes, an overcoat, a hat but was invisible. He took cool meat and coffee in a restaurant. He also took meal, sweets, wine etc, in a grocery store. Finally, he slept on a pile of quilts inside.

Griffin chased away
He did not wake up till the next morning. When the servants came, he began to run. They chased him. He escaped by taking off his newly-found clothes. This time he entered a theatrical company. He hoped to find some clothes. Shivering with cold he hurried to Drury Lane. It was the centre of the theatre world.

Enters a shop
He soon found a suitable shop. He went upstairs but came out a little later. He was now wearing bandages. Those were round his forehead. He wore dark glasses, false nose and big bushy side-whiskers. He attacked a shopkeeper. Then he robbed him of all his money. He then went to Iping village from London. There he booked two rooms at the local inn belonging to Mrs Hall.

Arrives in an inn
The arrival of a stranger at an inn in winter amazed the villagers. Mrs Hall, the landlord’s wife, wanted to be friendly with him. But he told her that he did not want to be disturbed. He also told her that an accident had affected his face.

Stealing of money by Griffin
The stolen money did not last long. He, however, pretended that he was expecting some money at any moment. Shortly afterwards, a curious episode occurred. Griffin had made himself invisible. He entered a clergyman’s house. The clergyman awoke and he asked him to surrender. But he could see no one. He realized the room was empty. Yet the desk had been opened and the money was missing. It was extraordinary for the clergyman.

Surprise of Mrs Hall
The landlord and his wife Mrs Hall were up very early. They were surprised to see the scientist’s door wide open. They peeped round but saw nobody. Clothes, bandages etc, were the room. Everything was in disorder

Mrs Hall in great terror
All of a sudden Mrs Hall heard a sniff close to her ear. Then the bedpost leapt up. It dashed itself into her face. Both of them turned away in terror. A chair pushed both out of the room. Mrs Hall almost fell down crying. She felt sure that the room was haunted by spirits.

Griffin suspected as a thief
Soon the burglary in the clergyman’s house became known. The strange scientist was suspected of having a hand in it. The suspicion became stronger as he produced ready cash. Earlier he had admitted of not having any.

The truth is out
The village constable was secretly called. But Mrs Hall did not wait for the constable. She went to the scientist. She asked him what he had been doing to her chair upstairs. She wanted to know how he had entered a locked room. At this the scientist grew angry. He suddenly shouted at her. He then threw off bandages, spectacles, nose etc. He had become invisible. The horrified people now saw at a headless person.

Constable Jaffers’ problem
Mr Jaffers, the constable, arrived. He was surprised that he had to arrest a man without a head. But he had to arrest him in any case. So he tried to catch the scientist. But he was throwing off one garment after another. The constable found himself struggling with someone he could not see at all. Some people tried to help him. But they received blows only from invisible Griffin.

Griffin vanishes
In the end, Jaffers became unconscious. There were cries of‘Hold him’. But Griffin had freed himself. No one knew where to lay hand on him.

Footprints without Feet Summary In Hindi

न जाने कहाँ से बच्चों द्वारा पैरों के निशान देखना
दो लड़के कीचड़ भरे ताजा निशान देखकर आश्चर्यचकित रह गए। ये नंगे पैरों के एक जोड़े के थे। जैसे उन्होंने घूरकर देखा न | जाने कहाँ से एक ताजा पैर का निशान दिखाई दिया। फिर उन्होंने गली में और कदम देखे। उसके पश्चात् वे अदृश्य हो गए।

अदृश्य वैज्ञानिक ग्रिफिन के पैरों के निशान
ये पैरों के निशान वैज्ञानिक ग्रिफिन के थे। उसने अभी अभी खोज लिया था कि मानव शरीर को पारदर्शी कैसे बनाया जाता है। उसने कुछ जड़ी-बूटियाँ निगल लीं। उसका शरीर शीशे की शीट की तरह पारदर्शी हो गया। यह उसके पैर के निशान दिखने से पहले था।

गैर कानूनी ग्रिफिन
परन्तु ग्रिफिन एक कानून से न चलने वाला व्यक्ति था। उसका मकान मालिक उससे घृणा करता था और उसने उसे बाहर निकालने की कोशिश की। बदले में ग्रिफिन ने घर को आग लगा दी। भागने के लिए उसे अपने कपड़े उतारने पड़े। इसलिए वह बिना घर वाला, बिना कपड़ों और धन के घुमक्कड़ बन गया। दोनों लड़कों ने उसे इस प्रकार देखा था।

ग्रिफिन का बच निकलना
ग्रिफिन लड़कों से बच निकला। उस समय अर्ध-शरद ऋतु में वह | बिना कपड़ों के था। गलियों में घमने की बजाय वह गर्मी के लिए लन्दन के एक बड़े स्टोर में प्रविष्ट हो गया। उसने बक्से खोले। उसने गर्म कपड़े पहने। उसने जूते, एक ओवरकोट, एक हैट पहने परन्तु वह अदृश्य था। उसने एक होटल में ठण्डा माँस और कॉफी ली। उसने एक किरयाने के स्टोर से खाना, मिठाई और शराब भी ली। अन्त में वह अन्दर रज़ाइयों के एक ढेर पर सो गया।

ग्रिफिन का पीछा किया जाना
वह अगली सुबह तक नहीं जागा। जब नौकर आए तो उसने दौड़ना आरम्भ कर दिया। उन्होंने उसका पीछा किया। वह अपने नए पाए गए कपड़ों को उतार कर बच निकला। इस समय वह एक नाटक कम्पनी में घुस गया। उसे कुछ कपड़ों के मिलने की आशा थी। सर्दी से काँपता हुआ वह ड्ररी लेन में चला गया। यह नाटकीय संसार का केन्द्र थी।

दुकान में घुसना
शीघ्र ही उसे एक ठीक दुकान मिल गई । वह ऊपर चला गया परन्तु थोड़ी देर बाद वापिस आ गया। अब वह पट्टियाँ बाँधे हुए था। ये उसके माथे के चारों तरफ थीं। उसने काले चश्मे पहने, एक नकली नाक लगाए और बड़े-बड़े झाड़ीदार गलमुच्छे लगाए हुए थे। उसने एक दुकानदार पर आक्रमण किया। फिर उसने उसका सारा धन लूट लिया। फिर वह लन्दन से आईपिंग गाँव चला गया। वहाँ पर मिसेज हॉल की सराय में उसने दो कमरे ले लिए।

सराय में आना
शरद ऋतु में सराय में एक अजनबी के आगमन पर गाँववासी आश्चर्यचकित हो गए। मकान मालिक की पत्नी मिसेज़ हॉल उसके साथ मैत्री सम्बन्ध बनाना चाहती थी। परन्तु उसने उसे बता दिया कि वह नहीं चाहता था कि उसे किसी प्रकार का विघ्न पड़े। उसने उसे यह भी बताया कि एक दुर्घटना ने उसके चेहरे को प्रभावित कर दिया था।

ग्रिफिन द्वारा धन की चोरी
चुराया गया धन काफी दिन नहीं चला। उसने बहाना बनाया कि उसे किसी भी क्षण धन प्राप्ति की आशा थी। थोड़ी देर पश्चात् एक आश्चर्यजनक घटना हो गई। ग्रिफिन ने स्वयं को अदृश्य बना लिया था। वह एक पादरी के घर में घुस गया। पादरी जाग गया और उसने उसे आत्म-समर्पण करने के लिए कहा। परन्तु वह किसी को भी नहीं देख सका। उसने महसूस किया कि कमरा खाली था। फिर भी डैस्क को खोला गया था और धन ग़ायब था। पादरी के लिए यह असाधारण था।

मिसेज हॉल का आश्चर्य
मकानमालिक और उसकी पत्नी मिसेज़ हॉल काफी पहले उठ गए थे। वे वैज्ञानिक के कमरे को खुला देखकर आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने झाँककर देखा परन्तु किसी को नहीं देखा। कपड़े, पट्टियाँ आदि कमरे में बिखरे हुए थे। हरेक वस्तु अस्त-व्यस्त थी।

मिसेज हॉल काफी आतंकित
अचानक मिसेज़ हॉल को उसके कान के समीप सँघने की आवाज़ सुनाई दी। फिर चारपाई ऊपर उठी। यह स्वयं उसके चेहरे पर जा लगी। वे दोनों भय से मुड़े। एक कुर्सी ने उन दोनों को कमरे से बाहर धकेल दिया। मिसेज़ हॉल लगभग चिल्लाती हुई गिर गई। उसे विश्वास हो गया कि कमरे में भूत आते थे।

ग्रिफिन पर चोर होने का सन्देह
शीघ्र ही पादरी के घर में चोरी का पता लग गया। अजीब वैज्ञानिक का उसमें हाथ होने पर सन्देह प्रकट किया गया। सन्देह अधिक मजबूत हो गया जैसे ही उसने नकद धन पेश किया। पहले उसने माना था कि उसके पास धन नहीं था।

सचाई सबके सामने
गाँव के सिपाही को चुपचाप बुलाया गया। परन्तु मिसेज़ हॉल ने सिपाही (के आने) की प्रतीक्षा नहीं की। वह वैज्ञानिक के पास चली गई। उसने उससे पूछा कि वह ऊपर की मन्ज़िल पर उसकी कुर्सी के साथ क्या कर रहा था। वह जानना चाहती थी कि वह एक बन्द कमरे में कैसे घुसा। इस पर वैज्ञानिक क्रोधित हो गया। वह उस पर एकदम चिल्लाया। फिर उसने पट्टियाँ, चश्मे, नाक आदि फेंक दिए। वह अदृश्य हो गया था। भयभीत व्यक्तियों ने अब बिना सिर के एक व्यक्ति को देखा।

सिपाही जैफर्ज की समस्या
सिपाही मि, जैफर्ज आ गया। उसे आश्चर्य हुआ कि उसे बिना सिर वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करना था। परन्तु उसे तो हर हालत में उसे पकड़ना था। इसलिए उसने वैज्ञानिक को पकड़ने की कोशिश की। परन्तु वह एक के बाद दूसरे कपड़ों को फेंक रहा था। सिपाही ने पाया कि वह उस व्यक्ति के साथ संघर्ष कर रहा था जिसे वह बिल्कुल भी नहीं देख सकता था। कुछ लोगों ने उसकी मदद करने की कोशिश की। लेकिन उन्हें अंदृश्य ग्रिफिन से केवल घूसे मिले।

ग्रिफिन का अदृश्य होना
अन्त में जैफर्स बेहोश हो गया। उसे पकड़ो’ की आवाजें आई। परन्तु ग्रिफिन ने स्वयं को स्वतंत्र कर लिया था। कोई नहीं जान पाया कि उसे कहाँ से पकड़े।

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