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NCERT class 10 English Literature Chapter 10 summary Ozymandias (notes) explained (translation) in hindi

Ozymandias Summary In English

The narrator relates what the traveller tells him
The narrator says that he met a traveller from a very old land. He told him what he saw there in a desert.

Describing what the traveller saw
The traveller told the narrator that he saw a broken statue of a man in the desert. There remained now two huge legs of stone of the man. These stood in the desert and had no trunk on them. Near the sand there lay a broken human face. The face (of Ozymandias) had an expression of a frown and scorn of brutal command. These emotions were so exact that they told of the intelligence of the sculptor. He had studied them very intelligently and carved them on the stone. Other features of the face

 

The traveller told the narrator that these expressions on the human face survived there in the desert. On those lifeless legs, one could see two things. One, the hand of the sculptor which mocked at those expressions. Second, the heart of the person (king Ozymandias) who had been carved in the stone.

Writing on the pedestal
On the pedestal there were written these words : ‘My name is Ozymandias, king of kings. Oh, you powerful! Look upon my deeds and be sad.’

What else remains
The traveller told the narrator that beside these legs and the human face there remained nothing. All around that huge broken statue there spread limitless, lone and level sands. These indicated the power of the time and the fate of the king who once had been mighty and mighty.

Ozymandias Summary In Hindi

वर्णनकर्ता का यात्री द्वारा जो कुछ उसने उसे ततया यताना
वर्णनकर्ता बताता है कि वह एक यात्री से मिला जो काफी प्राचीन स्थान से आया था। उसने उसे जो कुछ उसने वहाँ मरुस्थल में देखा था बताया।

वन जो यात्री ने देखा था।
यात्री ने वर्णनकर्ता को बताया कि उसने मरुस्थल में एक व्यक्ति का टूटा हुआ बुत देखा था। अब उस व्यक्ति की पत्थर में दो महान टांगें बची हुई थीं। ये मरुस्थल में खड़ी थीं और इनके ऊपर कोई धड़ नहीं था। इनके समीप रेत में मनुष्य का एक टूटा चेहरा पड़ा था। चेहरे (0zymandias के) पर तेवर की अभिव्यक्ति और निर्दयी आदेश की घृणा थी। ये भावनाएँ इतनी सही थीं कि उन्होंने शिल्पकार की प्रतिभा को दर्शा दिया। उसने इन्हें बहुत बुद्धिमत्ता से पढ़ा था और इन्हें पत्थर पर उतार दिया था।

चेहरे की दूसरी विशेषताएँ
यात्री ने वर्णनकर्ता को बताया कि मरुस्थल में मानव चेहरे की ये अभिव्यक्तियाँ जीवित रहीं। उन बेजान टांगों पर दो चीजें देखी जा सकती थीं। एक, शिल्पकार का हाथ जिसने इन अभिव्यक्तियों का मजाक उड़ाया था। दूसरा, उस व्यक्ति (सम्राट 0zymandias) का दिल जिसे पत्थर में तराशा गया था।

चेहरे की दूसरी विशेषताएँ
यात्री ने वर्णनकर्ता को बताया कि मरुस्थल में मानव चेहरे की ये अभिव्यक्तियाँ जीवित रहीं। उन बेजान टांगों पर दो चीजें देखी जा सकती थीं। एक, शिल्पकार का हाथ जिसने इन अभिव्यक्तियों का मजाक उड़ाया था। दूसरा, उस व्यक्ति (सम्राट 0zymandias) का दिल जिसे पत्थर में तेराशा गया था।

आधार को लिखाई
आधार पर ये शब्द लिखे हुये थे : ‘मेरा नाम ओजिमण्डीयास है, सम्राटों का सम्राट। ओह, आप सभी ताकतवरो ! मेरे कार्यों पर देखो और उदास हो जाओ।’

बाकी जो बचा हुआ है।
यात्री ने वर्णनकर्ता को बताया कि इन टांगों और मानव चेहरे के सिवाय वहाँ कुछ नहीं बचा था। उस टूटे हुये विशाल बुत के चारों तरफ असीमित, अकेले और समतल रेत बिछे हुये थे। इन्होंने समय की ताकत और सम्राट के भाग्य के बारे में बताया जो कभी ताकतवर व ताकतवर ही था।

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