You cannot copy content of this page

NCERT class 10 English Literature Chapter 11 summary The Rime of The Ancient Mariner (notes) explained (translation) in hindi

The Rime of the Ancient Mariner Summary In English

Part I

Introduction
The poem is about sin and repentance or crime and punishment. It describes how the ancient mariner kills the Albatross. The Polar spirit takes revenge on him and other mariners. Their sufferings are described in these parts vividly.

Ancient Mariner stops a Wedding-Guest
An elderly Mariner stopped one of the three Wedding-Guests. The Mariner had a long grey beard and brightly shining eyes. The Guests were going to the wedding feast. The Wedding-Guest asked him why he had stopped him. But the Mariner held him with his skinny hand. He, then, started at once narrating his strange tale.

 

Resistance by the Wedding-Guest
The Wedding-Guest told him that he was a close relative of the bridegroom and was required to be there. But he could not resist the Mariner’s spell of his glittering eyes. He sat on a stone as he had no choice but to hear the Mariner. The Mariner with bright eyes started narrating his tale like this.

Mariner’s story starts
He said that their ship was cheered off the harbour. They went farther and farther into the sea. The Wedding-Guest asked him to let him go because the marriage ceremony was at its climax. However, he could do nothing except hear the Mariner (now he was enjoying the story). The Mariner told that soon there came a severe sea-storm. It drove them southwards like a powerful enemy pursuing them.

Mariner’s ship in the icy region
Then it became very cold with both mist and snow. The ice, green like emerald, rose and came floating mast-high. They could see no living being amidst the ice all around the ship. The ice* cracked, roared and growled. There was ice only all around. Their ship stood trapped in it.

Coming of an Albatross
One day there came an Albatross to their ship through the fog. All welcomed it. It ate the food given by the mariners. It flew round and round near the ship. Soon the ice split and the south wind started. The ship was steered through the ice. The Albatross continued following them. It came there daily at 9 o’clock. It sat on the mast. It ate the food given to it by them. The night shone white in the moon-light. One day, the Mariner shot the Albatross dead with an arrow without any reason.

Part II

Weather improves—reaction by Mariners
The sun rose from the right. The south wind continued blowing. The weather improved. His fellow-mariners cursed him for killing the bird which made the wind blow. After some time, the wind began to blow again. There was sea- foam. The sun rose in the sky like God’s own head. It looked very beautiful and glorious. At this, the fellow-mariners said firmly that the Mariner did the right thing in killing the bird. It had brought the fog and mist. The weather became clear. It looked as if they were the first into that silent sea.

Weather goes worst
But soon the wind stopped blowing. The sails dropped down. Sadness prevailed all around. They spoke only to break the silence of the sea. The sun started blazing. The sky became red like copper. The sun stood bloody above the mast. The ship with them also stuck there. It looked as if it was all a painted thing.

Sea becomes fearful
For days together, they couldn’t move. Soon, the boards of the ship began to shrink. They had not a drop of water to drink. However, the water was all around them. The ocean looked like boiling yet the creatures in it were crawling. At night, the Mariner felt that death-like fires were dancing. He remembered Lord Christ at such a strange scene. The sea water was burning green, blue and white like a witch’s oils.

Polar spirit’s revenge—mariners’ sufferings
The mariners saw in dreams that a Spirit was plaguing them. It had been following them nine fathoms under the sea from the land of the mist and snow. The Mariner and his other fellow-mariners felt dry in their mouths. They could not speak. They felt as if they had been choked with soot. They held him responsible for their ills. They stared at him with evil looks. Then, one day, his fellow-mariners hung the dead Albatross round his neck as a punishment.

The Rime of the Ancient Mariner Summary In Hindi

Part I

परिचय
कविता पाप और पश्चात्ताप या अपराध और सजा के बारे में है। यह बताती है कि कैसे वृद्ध नाविक अल्वाट्रोस को मारता है। ध्रुवी प्रेतात्मा उस पर और दूसरे नाविकों पर बदला लेती है। उनके कष्टों का इन भागों में स्पष्टता से वर्णन किया गया है।

वृद्ध नाविक एक वैवाहिक मेहमान को रोकता है।
एक वृद्ध नाविक ने शादी के तीन मेहमानों में से एक को रोक लिया। नाविक की लम्बी श्वेत दाढ़ी और बड़ी ही चमकीली आँखें थीं। मेहमान वैवाहिक भोज में जा रहे थे। वैवाहिक मेहमान ने उससे पूछा कि उसने उसे क्यों रोका था। परन्तु नाविक ने उसे अपने दुर्बल हाथ से पकड़ा। फिर वह एक दम अपनी अदभुत कहानी सुनाने लग गया।

वैवाहिक मेहमान द्वारा विरोध
वैवाहिक मेहमान ने उससे कहा कि वह दूल्हे का निकट रिश्तेदार था और उसका वहाँ उपस्थित होना अनिवार्य था। परन्तु वह नाविक की चमकती आँखों के सम्मोहन को रोक नहीं सका। वह एक पत्थर पर बैठ गया क्योंकि नाविक को सुनने के सिवाय वह कुछ और नहीं कर सकता था। चमकती आँखों वाले नाविक ने अपनी कहानी ऐसे सुनाना आरम्भ किया।

नाविक की कहानी का आरम्भ
उसने बताया कि बन्दरगाह से उनके पोत को खुशी-खुशी विदाई दी गई थी। वे समुद्र में आगे-आगे बढ़ते रहे। शादी में सम्मिलित होने वाले मेहमान ने उसे जाने देने के लिये कहा क्योंकि शादी की रस्म चरम सीमा पर थी। परन्तु वह नाविक को सुनने के सिवाय कुछ नहीं कर सका (अब उसे कहानी अच्छी लगने लगी थी)। नाविक ने कहा कि शीघ्र ही एक तीखा समुद्री तूफान आया। इसने उन्हें दक्षिण की तरफ ऐसे धकेल दिया जैसे एक ताकतवर शत्रु उनका पीछा कर रहा हो।

नाविक का जहाज बर्फीले इलाके में
तब धुन्ध और बर्फ के साथ काफी ठण्ड हो गई। मस्तूल जितनी ऊँची पन्ने की तरह हरी चमकती बर्फ ऊपर को उठी और मस्तूल
की ऊँचाई पर तैरती हुई आई। पोत के चारों तरफ फैली हुई बर्फ | में वे कोई भी जीवित प्राणी नहीं देख सकते थे। यप ने टूटने की, | गुरनि की और चिंघाड़ने की आवाज की। चारों तरफ केवल बर्फ ही बर्फ थी। उनका पोत इसमें फंसकर रुक गया था।

अल्बाटोस का आना
एक दिन कोहरे में से वहाँ उनके पोत पर एक अल्बाटोस (विशाल समुद्री पक्षी) आ गया। सभी ने इसका स्वागत किया। इसने नाविकों द्वारा दिया गया खाना खाया। यह पोत के समीप चारों तरफ उड़ता रहा। शीघ्र ही बर्फ फट गई और दक्षिणी हवा बहने लग | गई। पोत को बर्फ के बीचों-बीच निकाला गया। अल्वाट्रोस उनके पीछे-पीछे आता रहा। यह वहाँ हर रोज 9 बजे आता था। यह मस्तूल पर बैठता था। उसने उनके द्वारा दिया गया भोजन खाया। रात, चाँद की रोशनी में सफेद चमकती रही। एक दिन नाविक ने बिना किसी कारण के अल्बाट्रोस को तीर से मार दिया।

Part II

मौसम में सुधार-नाविकों की प्रतिक्रिया
सूर्य, दाहिनी तरफ से निकला। दक्षिणी हवा बहती रही। मौसम ठीक हो गया। उसके साथी-नाविकों ने उसे उस पक्षी को मारने के लिए कांसा जिसके कारण हवा चलनी आरा हुई थी। कुछ समय के बाद फिर हवा चलने लगी। समुद्र में झाग उठे सूर्य आकाश में परमात्मा के निजी सिर की तरह उठा। यह बहुत सुन्दर और शानदार नजर आ रहा था। इस पर साथी-नाविकों ने दृढता से कहा कि नाविक ने पक्षी को मार कर अच्छा किया। उसके कारण कोहरा और धुन्ध आ गये थे। मौसम साफ हो गया। ऐसे लगता था जैसे कि वे उस शान्त समुद्र में आने वाले पहले व्यक्ति हों।

मौसम का अत्यधिक बुरा होना
परन्तु शीघ्र हवा का बहना रुक गया। पाल गिर गये। चारों तरफ उदासी छा गई। वे सिर्फ समुद्र को शान्ति को भंग करने के लिए ही बोले। सूर्य ने दहकना आरम्भ कर दिया। आकाश तांबे की तरह लाल हो गया। सूर्य मस्तूल के ऊपर खून की तरह लाल हुआ खड़ा रहा। उनके साथ पोत भी वहाँ पर अटक गया। वह ऐसे दिखाई दिया जैसे इसे चित्रित किया गया हो।

समुद्र का भयानक होना
कई दिनों तक वे हिल नहीं सके। शीघ्र ही पोत के फट्टे सिकुड़ना आरंभ हो गये। उनके पास एक बूंद पानी भी पीने को नहीं था। हालांकि पानी उनके चारों तरफ था। समुद्र उबलता हुआ दिखाई दिया यद्यपि इसमें जीव-जन्तु रेंग रहे थे। रात को नाविक ने महसूस किया कि मृत्यु- समान ज्वालाएँ नाच रही थीं। ऐसे आश्चर्यजनक दृश्य पर उसने लॉर्ड क्राइस्ट को याद किया। समुद्र का पानी डायन के तेलों की तरह हरा, नीला और सफेद उबल रहा था।

ध्रुवी प्रेतात्मा का बदला-नाविकों के कष्ट
नाविकों ने स्वप्न में देखा कि एक प्रेतात्मा उन्हें पीड़ित कर रही थी। वह धुन्ध और बर्फ के स्थान से समुद्र के नीचे नौ फैदम (54 | फुट) (चलती हुई) उनका पीछा कर रही थी। नाविक और उसके दूसरे साथी-नाविकों ने अपने मुँह में सूखापन महसूस किया। वे | बोल नहीं सके। उन्होंने ऐसा अनुभव किया जैसे उनके गले काजल से रुद्ध गये हों। उन्होंने अपनी कठिनाइयों के लिये उसे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने उसको बुरी नजरों से घूरा। तब एक दिन उसके साथी-नाविकों ने सजा के रूप में उसकी गर्दन के चारों तरफ मृत अल्बाट्रोस को लटका दिया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Free Web Hosting