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NCERT class 10 English Literature Chapter 12 summary Snake (notes) explained (translation) in hindi

Snake Summary In English

Introduction
In this poem the poet describes how a snake came to his water trough one hot day to drink water. The poet threw a log at it but it escaped into its hole. The poet stood criticizing himself for this act. What he says in his reaction is the subject matter of the poem.

A snake comes to drink water to the water trough
There came a snake to the poet’s water trough one hot day to drink water. The water trough was in the deep and scented shade of a carob tree. The poet also came there with his pitcher to take water. But he stood waiting as he had come there after the snake.

 

How the snake moves and drinks water
The snake came out from the dark inside of the earth. It pulled its yellow-brown loose soft- bellied body over the edge of the water trough. Resting its throat upon the stone bottom, it sipped water softly and silently. Then it lifted its head from drinking like the cattle do and looked vaguely at the poet. It flickered its two-forked tongue and thought for a moment. Being earth-brown and earth-golden, it stooped again and drank a little more water. It had come from the burning inside of the earth on the day of Sicilian July when Etna volcano was bursting out.

Poet’s inner voice
The poet’s inner voice said to him that the snake must be killed as such snakes in Sicily are poisonous. However, black snakes are not so.

Poet’s liking the snake
The poet, however, confessed that he liked the snake. Also he was glad that the snake had come there quietly like a guest. It would depart peacefully after drinking water. However, he questioned himself and wondered whether his not killing the snake proved his cowardice. Or whether his desire to talk to it proved his debasedness. However, he felt honoured that the snake had accepted his hospitality in drinking water at his water trough.

Snake’s return
The snake seemed licking its lips after the satisfaction of quenching his thirst. It looked around like a god. Then very slowly it proceeded to draw its slow length curving round. It climbed again the bank of the wall to retire.

Poet’s hitting it with a log
As the snake was returning and had almost entered its hole, the poet felt a kind of protest against it. He looked round and threw a log at the snake. The part of the snake’s body which was out of the hole twisted like lightning. In no time the snake had gone inside the hole. The poet stared with fascination at the snake. He regretted his act of throwing a log on the snake. His feeling to be a host to the snake had been hurt.

Poet’s accusing himself
The poet felt greatly hurt inwardly at his act of throwing a log at ‘his guest’. He called it ‘a vulgar and mean act’. He started hating himself and his “human education’. He thought of the sea bird albatross and wished the snake would come back again. He found the snake like an uncrowned king living in exile. He felt that he missed a chance (to honour a king). He would always regret this ‘pettiness’ on his part.

Snake Summary In Hindi

परिचय
इस कविता में कवि वर्णन करता है कि एक गर्म दिन कैसे एक साँप उसकी पानी की खौल पर पानी पीने के लिए आयी। कवि ने इस पर लकड़ी का एक टुकड़ा फेंका परन्तु यह अपने बिल में घुस गया। कवि इस कार्य के लिये स्वयं को कोसता हुआ खड़ा रहा। अपनी प्रतिक्रिया में वह जो कुछ कहता है वह इस कविता की विषय वस्तु है।

साँप का पानी की खौल पर पानी पीने के लिए आना
एक गर्म दिन एक साँप कवि की पानी की खौल पर पानी पीने के लिये आया। पानी की खौल कैरोब वृक्ष की गहरी और सुगंधित छाया के बीच थी। कवि भी अपने मटके के साथ पानी लेने के लिये वहाँ आया। परन्तु वह प्रतीक्षा करता खड़ा रहा क्योंकि वह साँप के बाद वहाँ आया था।

साँप का चलना और पानी पीना
साँप पृथ्वी के अन्धेरे से भरे अन्दरूनी स्थान से बाहर आया। इसने अपना नर्म पेट वाला ढीला पीला-भूरा शरीर पानी की सील के किनारे के ऊपर से खींचा। पत्थर की तली पर अपना गला रखते हुये इसने नम्रता और शान्ति से पानी पीया। फिर इसने जानवरों की तरह पानी पीते हुये ऊपर अपना सिर उठाया और अस्पष्ट तरीके से कवि की तरफ देखा। इसने अपनी दो-भागों में बँटी जीभ को बाहर-अन्दर किया और एक क्षण के लिये सोचा। पृथ्वी जैसे भूरे और पृथ्वी जैसे सुनहरी होते हुये यह फिर झुका और थोड़ा और पानी पीया। यह Sicily के जुलाई के गर्म दिन जब Etna ज्वालामुखी पहाड़ फट रहा था पृथ्वी के जलते हुए अन्दर के भाग से आया था।

कवि की अन्तरात्मा की आवाज
कवि की अन्तरात्मा ने उसे कहा कि साँप को अवश्य मारना चाहिये क्योंकि Sicily में ऐसे साँप जहरीले होते हैं। परंतु काले साँप ऐसे नहीं होते।

कवि का साँप को पसंद करना
फिर भी कवि ने माना कि उसे साँप पसन्द था। वह खुश भी था कि साँप एक मेहमान की तरह वहाँ चुपचाप आया था। पानी पीकर यह शान्ति से चला जायेगा। परंतु उसने स्वयं से प्रश्न किया और आश्चर्य जताया कि क्या उसके साँप को न मारने से उसका डरपोकपन सिद्ध होता था। या इससे बात करने की उसकी इच्छा ने उसकी विकृत्ति को सिद्ध कर दिया। फिर भी उसने अपनी शान का अनुभव किया कि साँप ने उसकी पानी की खौल से पानी पीने में उसके आतिथ्य को स्वीकार किया था।

साँप की वापसी
साँप अपनी प्यास बुझाने की सन्तुष्टि से अपने होंठ चाटता हुआ दिखाई दे रहा था। इसने किसी देवता की तरह चारों तरफ देखा। फिर बहुत धीरे से यह अपनी सुस्त लम्बाई को इधर-उधर मोड़ते हुये खींचने के लिये बढ़ा। यह वापिस जाने के लिए दोबारा दीवार के किनारे पर चढ़ गया।

कवि का इस पर लकड़ी का टुकड़ा फेंकना
जैसे साँप वापस जा रहा था और अपने बिल में लगभग घुस गया था कवि को इसके प्रति एक विरोध का अनुभव हुआ। उसने इधर-उधर देखा और साँप पर लकड़ी का एक टुकड़ा फेंक दिया। साँप के शरीर का वह भाग जो बिल के बाहर रह गया था आकाशीय बिजली की तरह इधर-उधर मुड़ा। क्षणभर में साँप विल में चला गया था। कवि ने आकर्षण से साँप पर देखा। उसने साँप पर लकड़ी का टुकड़ा फेंकने के कार्य पर पछतावा जताया। सांप का मेजबान बनने की उसकी भावना को ठेस पँहुचा था।

कवि को स्वयं को अपराधित मानना
कवि ने अपने मेहमान’ पर लकड़ी का एक टुकड़ा फेंकने के अपने कार्य पर अन्दर से अधिक चोटिल होना महसूस किया। उसने इसे एक ‘गन्दा और कमीना कार्य’ कहा। उसने स्वयं से और अपनी ‘मानवीय शिक्षा’ से घृणा करना आरम्भ कर दिया। उसने समुद्री पक्षी अल्बाट्रॉस के बारे में सोचा और चाहा कि साँप फिर वापस आये। उसने साँप को बिना ताज वाले सम्राट को वनवास में रहने वाले की तरह से पाया। उसने अनुभव किया कि उसने (एक सम्राट को सम्मान देने का) एक अवसर खो दिया। वह उसके उस ‘छोटेपन’ पर हमेशा पछतावा करता रहेगा।

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