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NCERT class 11 English Hornbill Chapter 4 summary Discovering Tut: the Saga Continues (notes) explained (translation) in hindi

Discovering Tut: the Saga Continues Summary In English

It was 6 p.m. on January 5, 2005 when the mummy of Tutankhamun moved smoothly and quietly into CT scanner which had been carried to Tut’s resting place. The aim was to probe the persisting medical mysteries of this young ruler who died more than 3,300 years ago. His dead body was embalmed and buried in a royal grave in the Valley of the Kings.

Howard Carter, a British archaeologist discovered Tut’s tomb in 1922 after years of futile search. Its contents remain the richest royal collection ever found. They include extremely attractive artifacts in gold as well as everyday things like board games, a bronze razor, linen undergarments, cases of food and wine.

Carter first recorded the Pharaoh’s funeral treasures. Then he began investigating his three nested coffins. The first one had a shroud covered with garlands of willow and olive trees, wild celery, lotus petals and cornflowers. These proved that he was buried in March or April. Carter ran into trouble when he reached the mummy. The ritual resins had hardened. These had cemented Tut to the bottom of his solid gold coffin. The solidified material was removed with the help of chisels. Then the mummy was cut free. Carter’s men removed the mummy’s head and severed nearly every major joint. Once they had finished, they reassembled the remains on a layer of sand in a wooden box with padding that concealed the damage. The team of scientists found it resting there. Zahi Hawass, Secretary General of Egypt’s Supreme Council of Antiquities observed that the mummy was in very bad condition because of what Carter had done in the 1920s.

Archaeology has changed a lot during the last few decades. Now it pays less attention to treasure and more to the fascinating details of life and puzzling mysteries of death. It uses more sophisticated tools including medical technology. In 1968 an Anatomy Professor X-rayed the mummy. He revealed a startling fact. The breast-bone and front ribs are missing. Now CT scanning was employed to answer two questions: (i) how did he die? and (ii) how old was he at the time of his death?

On the night of the scan, workmen carried Tut from the tomb in his box. They climbed a ramp and a flight of stairs into the swirling sand outside. Then they rose on a hydraulic lift into a trailer. This trailer held the scanner. Initially, there was some problem because of sand in a cooler fan. Then the technicians scanned the mummy head to toe. 1700 digital X-ray images in cross section were created. Tut’s head was scanned in 0.62 millimetre slices to register its complicated structures. Tut’s entire body was sirnilarly recorded. Then a team of specialists in radiology, forensics and anatomy began to probe the secrets.

A technician displayed astonishing images of Tut on a computer screen. A gray head took shape from a scattering of pixels. The technician spanned and tilted it in every direction, Neck vertebrae appeared quite clearly. Other images revealed a hand, several views of the ribcage, and a narrow cross section of the skull. Zahi Hawass smiled. He felt relieved to see that nothing had gone seriously wrong.

Discovering Tut: the Saga Continues Summary In Hindi

5 जनवरी 2005 को सन्ध्या के 6 बजे थे जब तूतनखामून की ममी CT scanner में खिसकती हुई गई। इस CT scanner को उसके विश्राम स्थल पर लाया गया था। उद्देश्य था कि इस युवा शासक के विषय में सारी चिकित्सा रहस्यों को ढूंढना। जो 3300 वर्ष पहले मरा था। उसके शव पर औषधियों का लेप करके उसे राजाओं की घाटी नामक राजसी कब्रिस्तान में दफनाया गया था।

हावर्ड कार्टर नामक एक ब्रिटिश पुरातत्ववेत्ता ने कई वर्षों की निष्फल तलाश के उपरान्त 1922 में तूत की कब्र खोज ली। इसमें संग्रहित सामग्री सर्वाधिक समृद्ध राजसी भण्डार है जो अब तक पाया गया। इनमें स्वर्ण की अत्यधिक आकर्षक मानव निर्मित वस्तुएँ तथा दैनिक प्रयोग की वस्तुएँ जैसे खेलने का बोर्ड, काँसे का उस्तरा, अन्दर के वस्त्र, भोजन एवं मद्य (शराब) की पेटियाँ हैं।

कार्टर ने पहले तो मिस्र के राजा के शव के साथ के खजाने की सूची बनाई। फिर उसने तीन शव-पेटियों का निरीक्षण करना आरम्भ किया। पहली वाली में एक मोटा वस्त्र था जो सरपत तथा जैतून के पत्तों, जंगली सेलेरी, कमल की पंखड़ियों तथा अन्न के साथ उगने वाले पौधों से बनी मालाओं से ढ़का हुआ था। इनसे सिद्ध होता था उसको मार्च या अप्रैल में दफनाया गया था। कार्टर तब कष्ट में फँसा जब वह मृत शरीर की ममी पर पहुँचा। अनुष्ठान में प्रयुक्त गोंद कठोर हो गया था। इसने तूत को ठोस सोने की शव पेटी के पेंदे में पक्का चिपका दिया था। छेनियों की सहायता से इसे ठोस बने हुए पदार्थ को हटाया गया। फिर ममी को इस से काट कर मुक्त किया गया। कार्टर के व्यक्तियों ने ममी का सिर काटा तथा लगभग प्रत्येक बड़े जोड़ को पृथक किया। जब उनका काम पूरा हो गया तो उन्होंने इन अवशेषों को नर्म पदार्थ लगे हुए एक लकड़ी के सन्दूक में रेत के ऊपर रख दिया जिनसे क्षति ढक गई। वैज्ञानिकों के दल ने इसे वहाँ लेटे पाया। जाही हवास जों मिस्र की पुरातत्व की सर्वोच्च सभा के महासचिव थे, ने कहा कि 1920 के दशक में कार्टर ने जो किया उसके कारण ममी बहुत खराब दशा में थी।

पिछले कुछ दशकों में पुरातत्व शास्त्र में काफी परिवर्तन आए हैं। अब यह धन को कम तथा जीवन की आकर्षक बातों तथा मृत्यु के पेचीदा रहस्यों पर अधिक ध्यान देता है। यह चिकित्सा तकनीक सहित अधिक परिष्कृत औज़ार प्रयोग करता है। 1968 ई में शरीर रचना के एक प्रोफेसर ने ममी का एक्स-रे चित्र लिया। उसने एक चौंकाने वाला तथ्य उजागर किया। छाती की हड्डी तथा सामने की पसलियाँ गायब है। अब दो प्रश्नों का उत्तर पाने के लिए कम्प्यूटर तकनीक द्वारा जांच के लिए चित्र निकाले गये : (i) वह कैसे मरा? तथा (ii) अपनी मृत्यु के समय वह कितने वर्ष का था।

जाँच की रात, श्रमिक तूत को उसकी कब्र से सन्दूक में ले गए। वह एक ढलान तथा सीढ़ियों तथा बाहर लहरदार रेत पर चढ़े। फिर वे पानी द्वारा चलने वाली लिफ्ट पर चढ़कर एक गाड़ी में पहुँचे। इस गाड़ी में जाँच की मशीन थी। आरम्भ में कूलर के पंखे में रेत आने के कारण कुछ समस्या हुई। फिर कुशल कर्मचारियों ने ममी के सिर से अँगूठे तक तीन आयामों के चित्र लिये। 1700 digital प्रणाली की X-ray छवियाँ लम्बे बल समकोण के कटाव में ली गई। तूत के सिर की जाँच 0.62 मिलीमीटर के टुकड़ों में की गई ताकि इसके पेचीदा बनावट का विवरण सही दर्ज किया जा सके। इसी प्रकार तूत के पूरे शरीर का विवरण लिखा गया। फिर विकिरण विशेषज्ञ, अपराध शास्त्र के वैज्ञानिक तथा शरीर रचना विशेषज्ञ गुप्त रहस्यों को ढूंढने लगे।

एक कुशल तकनीकी कारीगर ने कम्प्यूटर के पर्दे पर तूते की आश्चर्यजनक छवियों को दर्शाया (दिखाया) । बिखरे हुए चमकदार बिन्दुओं को एकत्र करने से भूरे बालों वाले एक सिर का आकार बनता गया। तकनीकी कारीगर ने इसे प्रत्येक दिशा में घुमाया तथा टेढ़ा किया। गर्दन रीढ़ की हड्डी के टुकड़े बिल्कुल स्पष्ट उभरे। अन्य आकृतियों में एक हाथ, पसलियों के कई कोणों से दृश्य तथा खोपड़ी की तंग लम्बाकार छवि थी। ज़ाही हवास मुस्कराया। उसने यह देख कर चैन की सांस ली कि कुछ भी गम्भीर रूप से नहीं बिगड़ा था।

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