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NCERT class 12 English Flamingo Chapter 10 summary An Elementary School Classroom in a Slum (notes) explained (translation) in hindi

An Elementary School Classroom in a Slum Summary In English

The children of an elementary school classroom in a slum look pathetic and miserable. They have pale and lifeless faces. Their disorderly hair are torn around and look like rootless weeds. They are depressed and keep their heads down. They have stunted growth. They inherit the diseases of their parents. They do have dreams. A sweet young boy is sitting unnoted at the back of his dim classroom. He is dreaming of squirrel’s game in trees and of other interesting places other than his dull and drab classroom.

The gifts given as donations and the picture of Shakespeare’s head are hung on the unpleasant creamy walls. But these are useless to these unfortunate children. In the early morning, the sky is cloudless. Domes of the institutions of the civilized world shine in every city. So are they in Tyrol Valley. Music of bells and fragrance of flowers pervade there. The map of this world is made and reshaped by the people in power. But for these children of a school in the slum that world is meaningless. Their own windows are dirty. Unpleasant surroundings form their world. The fog of uncertainty dominates their future. They are doomed to live in narrow streets closed in by the bluish grey sky. Their world is far away from rivers, capes and stars.

Shakespeare holds no interest for them. Nor the map of the world does them any good. This map shows a world which is not theirs. This world is full of attractions. There are beautiful ships, warmth of the sun and love. They entice these children. They are tempted to steal them away by running away from their miserable surroundings. They live in their narrow, crowded holes or lairs. Their life starts with the fog of uncertainty and ends with the endless night of their death. On the heap of the waste these small children wander with their bones peeping out of their skins. Wearing spectacles of steel with mended glasses, they look like pieces of broken bottles on stones. All their time and space is spent in these dirty and foggy slums. These slums are nothing less than living hells. Actually, they are a blot on their civilised world—the world of the rich and the great.

The map of the civilized world and the slums of these unfortunate children are two entirely different worlds. Governors, inspectors, visitors and other important persons must abridge this gap. They must peep into the world of the children living in the slums. They must make their own world the world of these slum children too. The unsuitable environment of the slums has blocked all their gates to progress. They are lying shut like catacombs (underground graves). These obstacles should be broken. Everything that binds them should be broken. They must be allowed to breathe in the open. They must be allowed to come out of their narrow lanes and dirty slums of the town. Let them enjoy the beauty of the green fields. Their world should extend to the sky-blue waves rising over the golden sands. Let the pages of wisdom be open for them. Let their tongues express themselves freely without any check or fear. Only those people make or create history whose language has the warmth and strength of the sun.

An Elementary School Classroom in a Slum Summary In Hindi

गन्दी बस्ती की प्राथमिक पाठशाला के एक कक्षा में बच्चे अत्यन्त करुणाजनक एवं दयनीय प्रतीत होते हैं। उनके चेहरे पीले तथा निर्जीव हैं। उनके बेतरतीब बाल उखड़े पड़े हैं तथा जड़ विहीन जंगली पौधों की भाँति दिखाई पड़ते हैं। वे उदास हैं तथा अपने सिरों को नीचे झुकाये हुये हैं। उनका विकास अवरुद्ध (रुका हुआ) है। वे अपने माता-पिता की बीमारियाँ विरासत में प्राप्त करते हैं। उनके भी अपने स्वप्न हैं। एक छोटा-सा सुन्दर लड़का, जिस पर किसी का ध्यान नहीं है, अपने धुंधले कक्षा-कक्ष में पीछे बैठा है। वह वृक्षों में गिलहरी के खेल तथा अन्य रुचिजनक स्थानों के स्वप्न देख रही है जो उसके नीरस तथा बदरंग कक्षा-कक्ष से अलग हो।

अप्रिय क्रीम रंग की दीवारों पर दान में प्राप्त उपहारों तथा शेक्सपीयर के सिर का चित्र टंगे हुये हैं। किन्तु इन अभागे बच्चों के लिये ये व्यर्थ हैं। ऊषाकाल में आकाश बादल रहित है। सभ्य संसार के प्रत्येक नगर में (शिक्षा) संस्थाओं के गुम्बद चमकते हुए दिखाई देते हैं। आस्ट्रिया की टाइरोल घाटी में भी ऐसा ही है। वहाँ भी घंटियों का संगीत तथा फूलों की सुगन्ध विद्यमान है। संसार का चित्र उन लोगों द्वारा तैयार किया जाता है तथा पुनः रूप दिया जाता है, जो सत्ता में हों। किन्तु गन्दी बस्ती के विद्यालय के इन छात्रों के लिये वह संसार अर्थहीन है। उनकी अपनी खिड़कियाँ गन्दी हैं। असुहावना वातावरण ही उनके संसार का निर्माण करता है। अनिश्चितता का कोहरा ही उनके भविष्य पर छाया रहता है। उनके भाग्य में ऐसी तंग गलियों में रहना बदा है जो नीलाभ भूरे आकाश से घिरी हुई हैं। उनका संसार नदियों, अन्तरीपों तथा सितारों के संसार से दूर, बहुत दूर है।

शेक्सपीयर उनके लिये कतई रुचिपूर्ण नहीं है। न ही संसार का मानचित्र उनकी कोई भलाई करता है। यह मानचित्र ऐसे संसार को दर्शाता है जो उनका अपना संसार नहीं है। यह संसार आकर्षणों से भरा पड़ा है। ये हैं सुन्दर पोत (जहाज), सूर्य तथा मानव प्रेम की गर्मी-ये बच्चों को ललचाती हैं। ये उन्हें अपने दयनीय वातावरण से दूर भागकर इन्हें प्राप्त करने के लिये प्रलोभित करती हैं। वे अपने तंग बिलों अथवा मांदों में अपना पूरा जीवन बिताते हैं। उनका जीवन अनिश्चितता के कोहरे से आरम्भ होता है तथा उनकी मृत्यु की अन्तहीन रात से समाप्त होता है। कूड़े के ढेरों पर ये बच्चे अपनी खाल से बाहर झांकती हुई हड्डयों के साथ भटकते रहते हैं। पैबन्द लगे शीशों से जड़े स्टील के चश्मे पहने, वे ऐसे लगते हैं जैसे पत्थरों पर बोतलों के टूटे हुये टुकड़े। ये गन्दी बस्तियाँ साक्षात जीवित नरक से कुछ कम नहीं हैं। वास्तव में ये उनके सभ्य संसार पर एक कलंक हैं-वह संसार जो अमीर तथा महान लोगों का है।

सभ्य संसार का मानचित्र तथा इन अभागे बच्चों की गन्दी बस्तियाँ—ये दो नितान्त भिन्न संसार हैं। राज्यपालों (प्रशासकों), निरीक्षकों, आगन्तुकों एवं अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों को इस अन्तर को कम करना चाहिये। उन्हें इन गन्दी बस्तियों में रहने वाले बच्चों के जीवन में भी झांक कर देखना चाहिये। उन्हें अपने संसार को इन गन्दी बस्तियों में रहने वाले बच्चों का संसार भी बनाना चाहिये। गन्दी बस्तियों के अनुपयुक्त वातावरण ने उनकी प्रगति के सारे मार्ग अवरुद्ध कर दिये हैं। वे भूमिगत कब्रों की भाँति बन्द पड़े हुये हैं। ये रुकावटें तोड़ देनी चाहिये। प्रत्येक चीज़ जो उन्हें बाँधती है, उसे तोड़ देना चाहिये। उन्हें खुली हवा में सांस लेने दिया जाना चाहिये। उन्हें अपने नगरों की गन्दी बस्तियों की तंग गलियों से बाहर निकलने की अनुमति देनी चाहिये। उन्हें हरे खेतों की सुन्दरता का आनन्द लेने दीजिये। उनके संसार का सुनहरी रेत पर उभरती हुई नीली-नीली समुद्री लहरों तक विस्तार कर दें। उनके लिये बुद्धिमत्ता की पुस्तकों के पृष्ठ खोल दो। उनकी जुबानों (जिल्ला) को बिना किसी बन्धन अथवा भय के स्वतन्त्र रूप से अपने आपको व्यक्त करने दो। केवल वे ही लोग इतिहास को निर्मित अथवा सृजित करते हैं जिनकी भाषा में सूर्य की ऊष्मा तथा ऊर्जा (शक्ति) हो।

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