You cannot copy content of this page

NCERT class 12 English Vistas Chapter 5 summary Should Wizard Hit Mommy ? (notes) explained (translation) in hindi

Should Wizard Hit Mommy? Summary In English

It was a Saturday evening. Every evening Jack told his daughter Jo a story out of his head. This custom began when she was two. Now he had been telling her bedtime stories for almost two years. His story had a central character named Roger-a small creature. It could be Roger Fish, Roger Squirrel or Roger Chipmunk. Today it was Roger Skunk.

This Roger Skunk smelled so bad that none of the other woodland creatures would play with him. They called him Stinky Skunk and then they would run away. Roger Skunk would stand there all alone. Tears would fall from his eyes. Jo asked if he would not see the owl. Jack said that Roger Skunk walked along very sadly to a very big tree. There was a huge, wise, old owl on the top most pointed end of the tree.

Roger Skunk told the owl that all the other animals ran away from him because he smelled very bad. The owl admitted that he did so. Roger Skunk cried very hard. He wanted to know what he could do. The owl suggested going to the wizard.

The owl advised Roger Skunk to go through the dark woods, under the apple trees, into the swamp and there would be the ‘wizard’s house over a crick (little river). On reaching the little white house, Roger Skunk rapped on the door. A tiny little old man came out, with a long white beard and a pointed blue hat. He observed that the creature smelled awful.

Roger Skunk said the huge, wise, owl had told him that he could help him. The wizard found his magic wand and asked Roger Skunk what he wanted to smell like. Roger thought and said, “Roses.” He chanted a magic spell. All of a sudden, the whole inside of the wizard’s house was full of the smell of roses. The wizard asked seven pennies for the work. Roger Skunk had only four pennies and he began to cry.

The wizard directed him to go to the end of the lane and turn around three times and look down the magic well. Roger Skunk did so and found three pennies in the magic well. He took them to the wizard. He was now very happy. He ran out into the woods. The other creatures gathered round him because he smelled very good. They played various games the children play. They played and laughed all afternoon. Then it began to get dark. They all ran to their mummies.

Jo thought that the story was all over. Jack didn’t like that she should take anything for granted. He continued the story further. Roger Skunk’s mother asked him about that awful smell. He was surprised and added that he smelt like roses. She then asked who had made him smell like that. He said that it was the wizard. Mommy asked him to come with her and they were going right back to that awful wizard.

Skunk protested that all other animals would run away. She said that he used to smell the way a little skunk should have. She took an umbrella and went back with Roger Skunk. She hit the wizard right over the head. The wizard said “OK”. Roger Skunk smelled very bad again. He no longer smelled like that of roses.

Jo put her hand out to touch his lips and said, “Then the wizard hit her on the head and did not change that little skunk back”. Her father continued the story in his own fashion. Skunk and his mother went home. They heard the sound of the train. When Daddy arrived home, they had their supper. Jack described the various items of their supper and the story was over.

Little Jo was not satisfied with the way her father had ended the story. She asked whether the other little animals did not run away. Jack told her that in a little while they got used to the way he was and did not mind it all.

Jo said that that was a stupid mommy. Jack said she wasn’t so. Jo felt he was defending his own mother to her, or something as odd. Jack asked her to put her head in the pillow and have a good long nap. Jo asked her father to tell her the story the next day that that wizard took that magic wand and hit that mommy right over the head.

Jack said that that was not the story. He stressed the point. Little skunk loved his mommy more than he loved all the other little animals and she knew what was right.

Jo again asked her father to say the next day that the wizard hit that mommy. She insisted that he should say so. Jack promised to see to it. He asked her to have a rest and stay on the bed. He praised her as a good girl.

Jack closed the door and went downstairs. His wife, Clare, had spread the newspapers and opened the paint can. She was wearing an old shirt of his on top of her maternity smock. She was stroking the chair rail with a dipped brush. He heard footsteps upstairs. He shouted to beat Joanne on the buttocks. Then the footsteps wavered.

Clare observed that it was a long story. He simply said “The poor kid”. He watched his wife working hard on the wood-work. It included a cage of mouldings and rails and base boards all around them. He felt caught in an ugly middle position. He also felt his wife’s presence in the cage with him. But he did not want to speak with her, work with her, touch her, anything. He watched everything with utter weariness.

Should Wizard Hit Mommy? Summary In Hindi

शनिवार की सन्ध्या (शाम) थी। प्रत्येक शाम जैक अपनी पुत्री जो को अपने आप सोचकर एक कहानी सुनाया करता था। यह प्रथा (रिवाज) तब आरम्भ हुई जब वह दो वर्ष की थी। अब वह उसे लगभग दो वर्ष से शयनकालीन कथाएँ सुनाये जा रहा था। उसकी कहानी में रोजर एक केन्द्रीय पात्र होता था जो एक छोटा-सा जीव था। यह रोजर मछली, रोजर गिलहरी, रोजर चिपमंक हो सकता था। आज यह रोजर स्कंक था।

इस रोजर स्कंक से इतनी बुरी दुर्गन्ध आती थी कि वन का कोई भी अन्य प्राणी उसके साथ नहीं खेलता था। वे उसे दुर्गन्धयुक्त (बदबूदार) स्कंक कहते तथा फिर भाग जाते रोजर स्कंक वहाँ अकेला खड़ा रह जाता। उसकी आँखों से आँसू गिरने लगते जो ने पूछा कि क्या वह उल्लू से नहीं मिलेगा। जैक ने कहा कि रोजर स्कंक बड़ी उदासी से भरा एक बड़े वृक्ष के पास चलकर पहुँचा। वृक्ष की नुकीली चोटी पर एक विशाल, बुद्धिमान, वृद्ध उल्लू रहता था।

रोजर स्कंक ने उल्लू को बताया कि सभी अन्य पशु उससे दूर दौड़ जाते थे क्योंकि उसकी गन्ध अत्यन्त बुरी थी। उल्लू ने स्वीकार किया कि ऐसा ही था। रोजर स्कंक जोर-जोर से रोया-चिल्लाया। वह जानना चाहता था कि वह क्या करे। उल्लू ने सुझाव दिया कि वह जादुई शक्तियों वाले ओझा (जादूगर) के पास जाए।

उल्लू ने रोजर स्कंक को परामर्श दिया कि वह अँधेरे जंगलों में से गुजरता हुआ, सेब के वृक्षों के नीचे से होता हुआ दलदल तक जाए तथा वहाँ एक छोटी नदी के ऊपर ओझा (जादूगर) का घर होगा। उस छोटे से श्वेत-घर पर पहुँचने के पश्चात रोजर स्कंक ने द्वार थपथपाया। एक छोटे कद का, लम्बी दाढ़ी तथा नुकीले नीले टोप वाला वृद्ध व्यक्ति बाहर निकला। उसने कहा कि वह जीव भयंकर गन्ध छोड़ रहा था।

रोजर स्कंक ने कहा कि वृद्ध उल्लू ने उसे बताया था कि वह उसकी सहायता कर सकता था। जादूगर ने अपनी जादू की छड़ी ढूँढी तथा रोजर स्कंक से पूछा कि वह किस प्रकार की गन्ध चाहता था। रोजर ने सोचा तथा कहा, “गुलाब”। उसने एक जादू का मन्त्र पढ़ा। अचानक जादूगर के घर का भीतरी भाग गुलाब की गन्ध से महक उठा। जादूगर ने इस काम के लिए सात पेंस माँगे । रोजर स्कंक के पास केवल चार पेंस थे, अत: वह रोने लगा।

जादूगर ने उसे गली के अन्त तक जाने को तथा तीन बार मुड़ने तथा जादुई कुएँ में नीचे देखने को कहा। रोजर स्कंक ने ऐसा ही किया तथा उसे जादुई कुएँ में तीन पेंस मिल गए। वह उन्हें जादूगर के पास ले गया। अब वह अत्यन्त प्रसन्न था। वह दौड़ता हुआ जंगल में गया। अन्य जीव (पशु) उसके चारों ओर एकत्रित हो गए क्योंकि उसमें से अत्यन्त अच्छी गन्ध (सुगन्ध) निकल रही थी। उन्होंने वे विभिन्न खेल खेले जो बच्चे खेलते हैं। वे पूरे अपराहन खेलते तथा हँसते रहे। फिर अन्धेरा होने लगा। वे सब अपनी-अपनी माताओं के पास दौड़ गए।

जो ने सोचा कि कहानी पूरी हो गई थी। जैक को यह पसन्द नहीं था कि वह किसी भी बात को स्वतः सिद्ध स्वीकार कर ले। उसने कहानी आगे जारी रखी। रोजर स्कंक की माँ ने उससे उस भयंकर गन्ध” के विषय में पूछा। वह आश्चर्यचकित हुआ तथा उसने कहा कि उसमें तो गुलाब की गन्ध आ रही थी। फिर उसने पूछा कि किसने उसे इस प्रकार की गन्ध देने वाला बनाया है। उसने कहा कि ऐसा करने वाला एक जादूगर था। माँ ने उसे कहा कि वह उसके साथ आए तथा वे तुरन्त उस भयंकर जादूगर के पास वापस चलेंगे।

स्कंक ने विरोध किया कि सभी अन्य पशु दूर भाग जाएँगे। उसकी माँ ने कहा कि उसमें से वही गन्ध निकला करती थी जैसी कि एक छोटे स्कंक में होनी चाहिए। उसने एक छतरी ली तथा रोजर स्कंक के साथ वापस चल पड़ी। उसने ऐन सिर के ऊपर जादूगर को चोट मारी। जादूगर ने कहा ”ठीक है।” रोजर स्कंक में से फिर से दुर्गन्ध निकलने लगी। अब वह गुलाब की भाँति गन्ध नहीं देता था।

जो ने उसके होठों को छूने के लिए हाथ बढ़ाया तथा कहा, “तब जादूगर ने उसके सिर पर चोट मारी तथा उस छोटे स्कंक को वापस नहीं बदला।” उसके पिता ने कहानी को अपने ढंग से ही आगे बढ़ाया। स्कंक तथा उसकी माँ घर गए। उन्होंने रेलगाड़ी की आवाज सुनी। जब पिताजी घर आए, तब उन्होंने रात्रि का हल्का भोजन किया। जैक ने रात्रि भोजन के विभिन्न व्यंजनों का वर्णन किया तथा कहानी समाप्त हो गई।

जिस ढंग से उसके पिता ने कहानी समाप्त की थी उससे छोटी जो सन्तुष्ट नहीं हुई। उसने पूछा कि क्या अन्य पशु भाग नहीं गए। जैक ने कहा कि कुछ समय उपरान्त जैसा वह था, वे उसकी आदी हो गए तथा उन्होंने कतई बुरा नहीं माना।।

जो ने कहा कि वह तो मूर्ख माता थी। जैक ने कहा कि वह ऐसी नहीं थी। जो ने सोचा कि वह उसके सामने अपनी माँ का बचाव कर रहा था अथवा ऐसी ही किसी अन्य विचित्र बात का। जैक ने उससे कहा कि वह तकिये में अपना सिर रखे तथा अच्छी लम्बी नींद की झपकी ले ले। जोअ ने अपने पिता से अगले दिन यह कहानी सुनाने को कहा कि जादूगर ने जादू की छड़ी ली तथा उस माँ के ऐन सिर पर दे मारी।।

जैक ने कहा कि कहानी ऐसे नहीं थी। उसने एक बिन्दु पर बल दिया। छोटा स्कंक अन्य सभी जीवों की तुलना में अपनी माँ को अधिक प्यार करता था तथा वह (उसकी माँ) जानती थी कि क्या ठीक (उचित) था।

जो ने फिर अपने पिता से कहा कि वह अगले दिन यह कहे कि जादूगर ने उस माँ को चोट मारी। उसने आग्रह किया कि वह ऐसा कहे। जैक ने वायदा किया कि धंह गौर करेगा। उसने उससे कहा कि वह विश्राम करे तथा बिस्तर पर ही रुके। उसने अच्छी बेटी के रूप में उसकी प्रशंसा की।

जैक ने द्वार बन्द किया तथा नीचे गया। उसकी पत्नी, क्लेअर, ने समाचारपत्र फैला रखे थे तथा रंग-रोगन का डिब्बा खोला हुआ था! वह मातृत्व की अपनी जनानी कमीज़ के ऊपर उसका एक पुराना कमीज़ पहने हुए थी। वह कुर्सी की लकड़ी की सलाख पर रोगन से भरी ब्रुश टकरा रही थी। उसने ऊपर की मंजिल में पदचाप सुनी। उसने जोनी को चिल्लाकर पिछवाड़े (चूतड़ों) पर पीटने को कहा, पदचाप रुक गई।

क्लेअर ने कहा कि यह तो काफी लम्बी कहानी थी। उसने मात्र यह कहा, “बेचारी बच्ची।” उसने दीवारों पर लकड़ी के बने। सजावटी सामान पर अपनी पत्नी को कठोर परिश्रम करते देखा। इसमें सजावटी पट्टी, सीधी सलाख तथा दीवारों के फर्श के साथ छूते सिरों पर लगी हुई लकड़ी की पतली-सी पटरी थी। उसने महसूस किया कि वह एक कुरूप मध्य स्थिति में पकड़ा गया था। उसने अपने साथ उस पिंजरे में अपनी पत्नी की उपस्थिति का भी आभास किया। किन्तु वह उसके साथ बोलना, काम करना, छूना-कुछ भी नहीं करना चाहता था। वह नितान्त थकान से प्रत्येक वस्तु को देखता रहा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Free Web Hosting