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NCERT class 9 English Beehive Chapter 10 summary A Legend of The Northland (Poem) (notes) explained (translation) in hindi

A Legend of The Northland Summary In English

About the Poetess
Phoebe Cary (Sept. 4, 1824 – July 31, 1871) was an American poetess, and the younger sister of Alice Cary. These sisters co-published poems in 1849, and then each went to publish volumes of their own.

Cary occasionally attended school. She often had to work at home and hence was largely self-educated. Her mother died in 1835, and two years later her father married again.

Phoebe died of hepatitis and was buried in New York. After the death of both sisters, a joint anthology of their poems was also completed.

Central Idea of the Poem
This poem puts forth the idea that we should not be selfish and always help the needy. A selfish person has no satisfaction in life.

Theme of the Poem
The Northland is a very cold region covered with snow. Its closeness to the north pole gives this place a cold weather with very few hours of sunlight. The poetess has written that here the hours of day are few and nights are long in winter. The people are unable to spend the whole night sleeping. The poetess doesn’t believe in the authenticity of the story yet she is tempted to share the story.

Once Saint Peter was on his usual round of travelling and preaching people. He felt hungry. He chanced upon an old cottage where a little woman was making cakes. Saint Peter went near the woman and asked for some cakes to eat.

The little woman started to bake a small cake for him. After the cake was done, she found it too big to be given for free. So she decided to bake an even smaller cake. This went on and on till she made a wafer for Saint Peter. She even kept that wafer with herself instead of giving it to Saint Peter because she was too greedy to part with a single morsel of food.

After Saint Peter’s curse the little woman went up through the chimney and turned into a woodpecker. Her whole body turned to coal black because of going up through the chimney.

Her red cap turned to the red scarlet of the woodpecker. After that people see her in the forest where she lives by boring and boring the dry wood in search of food.

A Legend of The Northland Summary In Hindi

कविता का केंद्रीय विचार
इस कविता का केंद्रीय विचार यह है कि मनुष्य को स्वार्थी नहीं होना चाहिए और जरूरतमंद को हमेशा मदद करनी चाहिए। स्वार्थी के जीवन में संतुष्टि का अभाव होता है।

कविता का सार
Northland एक ठंडा प्रदेश है जोकि बर्फ से ढूंका रहता हैं। North-pole के निकट होने के कारण यह प्रदेश अत्यधिक ठंडा रहता है और सूर्य की रोशनी भी वहाँ कम दिखाई देती है। कवयित्री के अनुसार यहाँ शुष्क समय कम रहता है और शरद ऋतु में रातें लंबी होती हैं। लोग पूरी रात सोकर गुजारने से असमर्थ हैं। लेकिन इस कविता की प्रामाणिकता के संबंध में कवयित्री आश्वस्त नहीं हैं। लेकिन फिर भी वे इस कहानी को सुनाने के लिए लालायित हैं।

एक बार संत Peter भ्रमण और लोगों के लिए धर्मोपदेश के अपने साधारण दौरे पर थे। उन्हें भूख लगी थी। उन्होंने एक पुरानी कुटिया देखी जहाँ एक बूढी औरत केक तैयार कर रही थी। संत Peter उसके पास पधारे और खाने के लिए कुछ केक माँगा।

उस बूढी औरत ने संत Peter के लिए छोटा केक बनाने का प्रयास किया। जब केक तैयार हो गया तो उसने देखा कि यह इतना अधिक बड़ा था कि इसे मुफ्त में नहीं दिया जा सकता था। अतः उसने और छोटा केक बनाने का फैसला किया। यह कार्य तब तक चलता रहा जब तक उसने संत Peter के लिए पापड़ जैसा केक तैयार नहीं कर लिया। संत Peter को यह केक देने के बजाय उसने केक को अपने पास रख लिया, क्योंकि वह इतना अधिक लालची थी कि किसी को एक कौर खाना भी देना नहीं चाहती थी।

उसके लालच को देखकर संत Peter को गुस्सा आ गया। वे बोले कि वह बूढी औरत इतना अधिक स्वार्थी है कि वह मनुष्य के रूप में नहीं रह सकती है। उन्होंने उस औरत को पक्षी बन जाने का शाप दिया और जंगल में अल्प भोजन की तलाश में जीवन व्यतीत करने के लिए छोड़ दिया। वह कठोर जंगल में अपने चोंच से भोजन खोद-खोद कर निकालने के लिए छोड़ दी गई।

संत Peter से शापित होने के बाद वह बूढी औरत चिमनी के रास्ते बाहर निकल गई और कठफोड़वा में रूपांतरित हो गई। उसका शरीर कोयला जैसा काला था, क्योंकि वह चिमनी के रास्ते बाहर निकली थी।

उसकी लाल टोपी कठफोड़वा के लाल पंख में रूपांतरित हो गयी। इसके बाद लोग उसे जंगल में देखते हैं, जहाँ वह भोजन की तलाश में कठोर लकड़ी को अपने चोंच से खोद-खोद कर जीवित रहती है।

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