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Sanskrit translation of chapter 11 पुष्पोत्सवः in hindi class 6

पुष्पोत्सवः


पाठ परिचय (Introduction of Lesson)

इस पाठ में पुष्पों के उत्सव “फूल वालों को सैर” का वर्णन आया है। यह उत्सव दिल्ली में अक्टूबरके महीने में मनाया जाता है। पुष्यों से बने पंखे इस उत्सव का मुख्य आकर्षण हैं। यह उत्सव गत दो सौ वर्ष से चलता आ रहा है।

इस पाठ में स्प्तमी विभक्ति के शब्द रूप का प्रयोग आया है। सप्तमी का प्रयोग ‘में’ (in) तथा ‘पर’ (on) के अर्थ में होता है। यथा-स्कूल में (in the school) – बिद्‌यालये, वक्ष पर (on the tree ) = वृक्षे इत्यादि।


(क) उत्सवप्रिय: भारतदेश:। अत्र कुत्रचित्‌ शस्योत्सव: भवति, कुत्रचित्‌ पशूत्सव: भवति, कुत्रचित्‌ धार्मिकोत्सव: भवति कुत्रचित्‌ च यानोत्सव:। एतेषु एवं अस्ति अन्यतम: पुष्पोत्सव: इति। अयं ‘फूलवालों की सैर’ इति नाम्ना प्रसिद्ध: अस्ति।

सरलार्थ- भारत उत्सव प्रेमी देश है। यहाँ कहीं पर (फसलों) का उत्सव होता है, कहीं पर पशुओं का उत्सव होता है। कहीं पर थार्मिक उत्सव होता है तो कहीं पर गाड़ियों का उत्सव होता है। इनमें से एक है-पुष्पोत्सव (फूलों का उत्सत)। यह “फूल वालों की सैर’ इस नाम से प्रसिद्ध है।


(ख) देहल्या: मेहरौलीक्षेत्रे ऑक्टोबरमासें अस्य आयोजनं भवति। अस्मिन्‌ अवसरे तत्र बहुविधानि पुष्पाणि दृश्यन्ते। परं प्रमुखम्‌ आकर्षणं तु अस्ति पुष्पनिर्मितानि व्यजनानि। जना: एतानि पुष्पव्यजनानि । योगमायामन्दिरे बख्तियारकाकी इत्यस्य समाधिस्थले च अर्पयन्ति। केचन पाटलपुष्पै: निर्मितानि, केचन कर्णिकारपुष्पै:, अन्ये जपाकुसुमै:, अपरे मल्लिकापुष्पै:, इतरे च गेन्दापुष्पै: निर्मितानि व्यजनानि नयन्ति।

सरलार्थ- देहली के मेहरौली क्षेत्र में अक्टूबर के महीने में इसका आयोजन होता है। इस अवसर पर अनेक प्रकार के फूल दिखाई देते हैं। किंतु मुख्य आकर्षण होता है-‘ फूर्ला से बने पंखे।’ लोग इन फूलों के पंखों को योग माया के मंदिर में बख्तियार काकी की समाधि पर अर्पित करते हैं। कुछ गुलाब के फूलों से बने होते हैं, कुछ कनेर के फूलों से, कुछ जवा फूलों से, कुछ चमेली के फूलों से दूसरे गेंदा फूलों से बने पंखे लाते हैं।


(ग) अयम्‌ उत्सव: दिवसत्रयं यावत्‌ प्रचलति। एतेषु दिवसेषु पतङ्गानाम् उड्डयनम्, विविधा: क्रीडा: मल्लयुद्ध चापि प्रचलति। विगतेभ्य: द्विशतवर्षभ्य: पुष्पोत्सव: जनान्‌ आनन्दयति। मध्ये इयं परम्परा स्थगिता आसीतू। परं स्वतन्त्रताप्राप्ते: पश्चात्‌ इयं मनोहारिणी परम्परा पुनः समारब्धा। पुष्पोत्सव: अद्यापि सोल्लासं सोत्साहं च प्रचलति।

सरलार्थ- यह उत्सव तीन दिन तक चलता रहता है। इन दिनों में पतंगों का उड़ाना, विविध क्रौड़ाएँ और कुश्ती भी चलती हे। गत दो सौ साल से पुष्पोत्सव लोगों को आनंदित कर रहा है। बीच में यह परंपरा स्थगित हो गई थी। किंतु स्पतंत्रता प्राप्ति के बाद यह मनोहारी प्रथा पुनः शुरू हो गई है। पुष्पोत्सत आज भी उत्साहपूर्वक और उल्लासपूर्वक चलता है।


 

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