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Sanskrit translation of chapter 6 समुद्रतट in hindi class 6

समुद्रतट


पाठ परिचय (Introduction of the lesson)

इस पाठ म॑ तृताया तथा चतुर्थी विभकति के शब्द रूप का प्रयोग आया हैं। सरल शब्दों में “के द्वारा’ ‘से’ (with , by) के अर्थ में तृतीया विभक्ति पद तथा ‘के लिए! (for) के अर्थ में चतुर्थी विभकति पद का प्रयोग किया जाता है। यथा-

(i) “कन्दुकेन’-गेंद से (with a ball) , तरङ्गै :- लहरों से (with waves )

(ii ) “पर्यटनाय ‘-पर्यटन/घूमने के लिए (for tourism) , पठनाय-पढ़ने के लिए (for study)

वाक्य प्रयोग-

।. बालक: कन्दुकेन क्रीडति। 1.बच्चा गेंद से खेलता है।

2. सः पठनाय विद्यालयम्‌ गच्छति। 2. वह पढ़ने के लिए विद्यालय जाता है।


(क) एष: समुद्रतट:। अत्र जना: पर्यटनाय आगच्छन्ति। केचन तरड़्रै: क्रीडन्ति। केचन च नौकाभि: जलविहारं कुर्वन्ति। तेषु केचन कन्दुकेन क्रीडन्ति। बालिका: बालका: च बालुकाभि: बालुकागृहं रचयन्ति। मध्ये मध्ये तरड्रग: बालुकागृह प्रवाहयन्ति। एषा क्रीडा प्रचलति एव। समुद्रतटा: न केवल पर्यटनस्थानानि। अत्र मत्स्यजीविन: अपि स्वजीबिकां चालयन्ति।

सरलर्थ – यह समुद्रतट है। यहाँ लोग पर्यटन के लिए आते हैं। उनमें से कुछ लहरों से क्रीडा करते हैं। कुछ नौकाओं द्वारा जलविहार करते हैं। उनमें से कुछ गेंद से खेलते हैं। लड़कियाँ और लड़के रेत से घर बनाते हैं। बीच-बीच में लहरें रेत का घर बहा ले जाती हैं। यह खेल चलता ही रहता है। समुद्र तट केवल पर्यटन-स्थल नहीं। यहाँ मछुआरे भी अपनी आजीविका चलाते हैं।


(ख) अस्माकं देशे बहव: समुद्रतटा: सन्ति। एतेषु मुम्बई-गोवा-कोच्चि-कन्याकुमारी विशाखापत्तनम्‌-पुरीतटा: अतीव प्रसिद्धा: सन्ति। गोवातट: विदेशिपर्यटकेभ्य: समधिकं रोचते। विशाखापत्तनम्‌-तट: वैदेशिकव्यापाराय प्रसिद्ध:। कोच्चितट: नारिकेलफलेभ्य: ज्ञायते। मुम्बईनगरस्य जुहूतटे सर्वे जना: स्वैरं विहरन्ति। चेन्‍नईनगरस्य मेरीनातट: देशस्य सागरतटेषु दीर्घतम:।

सरलर्थ – हमारे देश में बहुत से समुद्रतट हैं। इनमें मुम्बई, गोवा, कोच्चि, कन्याकुमारी, विशाखापत्तनम्‌ तथा पुरी का तट बहुत प्रसिद्ध है। गोवा का तट विदेशी पर्यटकों को बहुत ज़्यादा पसंद है विशाखापत्तनम्‌ का तट विदेशी व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। कोच्चि का तट नारियल के लिए जाना जाता है। मुम्बई नगर के जुहू तट पर सब लोग अपनी इच्छानुसार विहार करते हैं। चेन्‍नई का मेरीना तट देश के सभी तटों में सबसे लंबा है।


(ग) भारतस्य तिसृषु दिशासु समुद्रतटा: सन्ति। अस्माद्‌ एवं कारणात्‌ भारतदेश: प्रायद्वीप: इति कथ्यते। पूर्वदिशायां बङ्गोपसागर: दक्षिणदिशायां हिन्दमहासागर: पश्चिमदिशायां च अरबसागर: अस्ति। एतेषां त्रयाणाम्‌ अपि सागराणां सङ्गम: कन्याकुमारीतटे भवति। अत्र पूर्णिमायां चन्द्रोदय: सूर्यास्तं च युगपदेव द्रष्टुं शक्यते।
सरलर्थ – भारत की तीनों दिशाओं में समुद्रतट हैं। इसी कारण से भारत देश को प्रायद्वीप भी कहा जाता है। पूर्व दिशा में बंगाल की खाडी, दक्षिण दिशा में हिंद महासागर और पश्चिम दिशा में अरब सागर है। इन तीनों सागयों का संगम कन्याकुमारी के तट पर होता है। यहाँ पूर्णिमा के अवसर पर चन्द्रोदय और सूर्यास्त एक साथ ही देखा जा सकता है।

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